गाइड का हिस्सा: लाभ-हानि, बैलेंस शीट और नकदी प्रवाह: तीन वित्तीय विवरणों की व्याख्या
समझेंईबीआईटीडीए बनाम पीएटी: दोनों क्या मापते हैं और इनमें अंतर क्यों होता है
ईबीआईटीडीए और कर के बाद का मुनाफ़ा (पीएटी) कंपनी की कमाई को दो अलग नज़रियों से दिखाते हैं। दोनों में क्या शामिल है, क्या नहीं, और काल्पनिक आँकड़ों के साथ एक उदाहरण।
नतीजों के विवरण में अक्सर मुनाफ़े के दो आँकड़े दिए जाते हैं, ईबीआईटीडीए और पीएटी। दोनों अलग सवालों के जवाब देते हैं, इसलिए इनमें अंतर होता है, कभी-कभी काफ़ी बड़ा।
दोनों की परिभाषा
- ईबीआईटीडीए का मतलब है ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई। यह राजस्व में से कारोबार चलाने की लागत घटाने के बाद बचती है, यानी वित्तपोषण की लागत, कर और संपत्तियों के लेखा-खर्च से पहले। यह क़ानूनी विवरण की कोई पंक्ति नहीं है; कंपनियाँ इसे खुद निकालती हैं।
- पीएटी यानी कर के बाद का मुनाफ़ा: इसमें सब कुछ घटा दिया जाता है, ब्याज, मूल्यह्रास और कर समेत। यह लाभ-हानि विवरण की “आख़िरी पंक्ति” है।
एक उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े)
एक काल्पनिक कंपनी के लिए, ₹ करोड़ में:
| पंक्ति | राशि |
|---|---|
| राजस्व | 1,000 |
| परिचालन लागत (सामग्री, कर्मचारी, अन्य) | 800 |
| ईबीआईटीडीए | 200 |
| मूल्यह्रास और परिशोधन | 50 |
| चुकाया गया ब्याज | 40 |
| कर से पहले का मुनाफ़ा | 110 |
| कर | 30 |
| पीएटी | 80 |
ईबीआईटीडीए 200 है और पीएटी 80। 120 का अंतर मूल्यह्रास (50), ब्याज (40) और कर (30) से बना है।
दोनों क्यों दिखाए जाते हैं
ईबीआईटीडीए दिखाता है कि वित्तपोषण के फ़ैसलों और लेखा-खर्च से पहले कामकाज कैसा रहा, जिससे अलग-अलग कर्ज़ वाली कंपनियों की तुलना में मदद मिलती है। पीएटी दिखाता है कि सभी लागतों के बाद शेयरधारकों के लिए क्या बचा। भारी कर्ज़ या बड़ी संपत्तियों वाली कंपनी का ईबीआईटीडीए ऊँचा और पीएटी छोटा हो सकता है।
किन बातों पर ध्यान दें
- ईबीआईटीडीए असली लागतों को छोड़ देता है, जैसे उपकरण बदलने की लागत और वह ब्याज जो चुकाना ही पड़ता है।
- कंपनियों के बीच परिभाषा अलग हो सकती है, जैसे अन्य आय शामिल है या नहीं। देखें कि कंपनी इसे कैसे परिभाषित करती है।
- पीएटी इंड एएस के लाभ-हानि विवरण की तय पंक्ति है; ईबीआईटीडीए इंड एएस या जीएएपी का मान्यता प्राप्त माप नहीं है, यह कंपनियों का खुद निकाला हुआ आँकड़ा है, और इसी वजह से इसकी परिभाषा अलग-अलग हो सकती है (पिछला बिंदु)। दोनों में से कोई भी नकदी नहीं है: दोनों उपार्जन (एक्रुअल) आधार पर निकाले जाते हैं। मुनाफ़े और नकदी का अंतर समझने के लिए देखें तीन वित्तीय विवरण।
नतीजों के विवरण की बाकी पंक्तियों की पूरी सूची के लिए देखें तिमाही नतीजे कैसे पढ़ें।

