ट्रांसरेल लाइटिंग ने ₹412 करोड़ के नए ऑर्डर मिलने की जानकारी दी, इस साल का ऑर्डर इनटेक ₹2,021 करोड़ हुआ
ट्रांसरेल लाइटिंग ने 6 अक्टूबर 2026 को एक्सचेंजों को बताया कि उसे ₹412 करोड़ के नए ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर मिले हैं, ज़्यादातर बिजली लाइनों की रीकंडक्टरिंग के। साल का ऑर्डर इनटेक ₹2,021 करोड़ है। फ़ाइलिंग में ग्राहकों के नाम या काम पूरा करने की अवधि नहीं दी गई है।
बिजली ट्रांसमिशन लाइनें बनाने वाली कंपनी ट्रांसरेल लाइटिंग लिमिटेड ने 6 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसे अपने ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टी एंड डी) कारोबार में ₹412 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। कंपनी के अनुसार इन ऑर्डरों के बाद साल का उसका ऑर्डर इनटेक, यानी साल की शुरुआत से अब तक जीते गए नए ऑर्डरों का कुल मूल्य, बढ़कर ₹2,021 करोड़ हो गया है। ऑर्डर मुख्य रूप से भारत में हैं। कंपनी की फ़ाइलिंग में ग्राहकों के नाम नहीं हैं और यह भी नहीं बताया गया कि काम में कितना समय लगेगा।
कंपनी ने क्या कहा
यह जानकारी बीएसई और एनएसई को सेबी की लिस्टिंग नियमावली के विनियम 30 के तहत दी गई, जो सूचीबद्ध कंपनियों से बड़े ऑर्डर जैसी अहम घटनाओं की जानकारी एक्सचेंजों को देने को कहता है। कंपनी ने कहा कि सभी ऑर्डर कारोबार के सामान्य क्रम में मिले।
| मद | विवरण |
|---|---|
| घोषणा की तारीख़ | 6 अक्टूबर 2026 |
| नए ऑर्डर | ₹412 करोड़ |
| कारोबार | ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टी एंड डी) |
| काम का मुख्य प्रकार | भारत में कंपनी के बनाए एचटीएलएस कंडक्टरों से ट्रांसमिशन लाइनों की रीकंडक्टरिंग |
| इन ऑर्डरों के बाद साल का ऑर्डर इनटेक | ₹2,021 करोड़ |
| “एल1” ऑर्डर | ₹409 करोड़ |
रीकंडक्टरिंग का मतलब है बिजली लाइन के मौजूदा तारों को नए तारों से बदलना। कंपनी ने अपने एचटीएलएस कंडक्टरों को कार्बन कोर वाले उच्च-प्रदर्शन तार बताया, जो कंपनी खुद बनाती है और जिनसे लाइन जितनी बिजली की धारा ले जा सकती है उसे बढ़ाया जाता है। एल1 का मतलब है कि किसी ठेके के लिए कंपनी की बोली बोली लगाने वालों में सबसे कम थी। कंपनी ने कहा कि उसके पास कुल ₹409 करोड़ के एल1 ऑर्डर हैं। एल1 की स्थिति पक्का ऑर्डर नहीं है, और फ़ाइलिंग यह नहीं बताती कि ये ऑर्डर दिए जाएँगे या कब।
हिसाब
ऑर्डर बुक किसी कंपनी के जीते गए पर अभी पूरे न हुए ऑर्डरों का कुल मूल्य होती है। ऑर्डर इनटेक किसी अवधि में जीते गए नए ऑर्डरों का मूल्य है। फ़ाइलिंग इनटेक बताती है। वह कंपनी की ऑर्डर बुक का आकार नहीं बताती, इसलिए यह लेख कोई आँकड़ा नहीं देता। प्रबंध निदेशक और सीईओ रणदीप नारंग ने विज्ञप्ति में कहा कि नए ऑर्डर “further helps to increase our orderbook”।
बताए गए इनटेक में से नए ऑर्डर घटाने पर इस घोषणा से पहले का इनटेक ₹1,609 करोड़ (₹2,021 करोड़ घटा ₹412 करोड़) निकलता है। कंपनी ने विज्ञप्ति में “few days back” घोषित किए गए रीकंडक्टरिंग ऑर्डरों का ज़िक्र किया, जो ₹412 करोड़ से अलग हैं। विज्ञप्ति में “for the year” लिखा है और साल का नाम नहीं दिया गया, इसलिए यह लेख उसे कोई नाम नहीं देता।
विज्ञप्ति के अन्य बयान
कंपनी ने कहा कि उसकी विनिर्माण क्षमता अब टावरों के लिए 184,400 टन प्रति वर्ष और कंडक्टरों के लिए 40,800 km प्रति वर्ष है। सीईओ ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के चरण-III को सरकार की मंज़ूरी का भी ज़िक्र किया, जो गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली ले जाने वाला बिजली-लाइन कार्यक्रम है, और जिसे उन्होंने 900 GW गैर-जीवाश्म उत्पादन की निकासी से जोड़ा। ये कंपनी के बयान हैं, इस लेख के निष्कर्ष नहीं।
इन आँकड़ों का आधार
ऊपर के सभी आँकड़े ट्रांसरेल लाइटिंग की अपनी विज्ञप्ति से हैं, जो 6 अक्टूबर 2026 को सेबी की लिस्टिंग विनियमावली के विनियम 30 के तहत एनएसई में दाखिल की गई (बीएसई स्क्रिप कोड 544317, एनएसई सिंबल TRANSRAILL)। फ़ाइलिंग खोलकर पढ़ी गई। Wire & Cable India में वही आँकड़े हैं (₹412 करोड़, ₹2,021 करोड़, ₹409 करोड़, एचटीएलएस रीकंडक्टरिंग)। ₹1,609 करोड़ तक का घटाव हमारा अपना हिसाब है। फ़ाइलिंग में केवल “for the year” लिखा है। फ़ाइलिंग में ग्राहकों के नाम, काम पूरा करने की अवधि और ऑर्डर बुक का कुल आँकड़ा नहीं है। यह लेख केवल घोषणा की जानकारी देता है और कंपनी या उसके शेयरों पर कोई राय नहीं रखता।

