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आरबीआई ने रेपो दर 5.25% से बढ़ाकर 5.5% की, यह वह दर है जिस पर बैंक उससे उधार लेते हैं

मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर 2026 को सर्वसम्मति से रेपो दर 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% करने के पक्ष में वोट दिया और अपना रुख़ "कैलिब्रेटेड टाइटनिंग" कर दिया। इस विज्ञप्ति में FY27 के लिए वृद्धि का अनुमान 7.1% और महँगाई का अनुमान 5.2% किया गया है।

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प्रतीकात्मक चित्र

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 7 अक्टूबर 2026 को अपनी नीतिगत रेपो दर 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.25% से 5.50% कर दी। रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले आरबीआई से कम अवधि के लिए पैसा उधार लेते हैं। एक बेसिस पॉइंट एक प्रतिशत अंक का सौवाँ हिस्सा होता है, यानी 25 बेसिस पॉइंट 0.25 प्रतिशत अंक के बराबर हैं।

यह फ़ैसला आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 5-7 अक्टूबर 2026 की अपनी बैठक में लिया। आरबीआई की विज्ञप्ति के अनुसार दर में बदलाव 7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है।

प्रमुख दरें

दर पहले अब
नीतिगत रेपो दर 5.25% 5.50%
स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी (एसडीएफ) दर, जिस पर बैंक अपना अतिरिक्त धन आरबीआई के पास रखते हैं 5.00% 5.25%
मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी (एमएसएफ) दर, जिस पर बैंक आरबीआई से रातोंरात के लिए अतिरिक्त धन उधार लेते हैं 5.50% 5.75%
बैंक रेट 5.50% 5.75%

“पहले” के स्तर आरबीआई की अगस्त 2026 की नीति विज्ञप्ति में बताए गए स्तर हैं।

वोट और रुख़

एमपीसी के सभी सदस्यों ने रेपो दर बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया। समिति ने अपना नीतिगत रुख़, यानी नीति की अपनी घोषित दिशा, भी “न्यूट्रल” से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” कर दिया। दो सदस्यों, Dr. Nagesh Kumar और Prof. Ram Singh, ने रुख़ को न्यूट्रल ही रखने के पक्ष में वोट दिया। आरबीआई की विज्ञप्ति में कहा गया कि इस रुख़ का मतलब है कि निकट अवधि में दरों में कटौती की संभावना नहीं है।

2026-27 के लिए महँगाई और वृद्धि के अनुमान

मापदंड Q2 Q3 Q4 पूरा वर्ष
वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.2% 6.9% 6.8% 7.1%
सीपीआई महँगाई (उपभोक्ता मूल्य महँगाई) 4.9% 6.0% 5.7% 5.2%

आरबीआई का अनुमान है कि 2027-28 की Q1 में जीडीपी वृद्धि 7.1% और सीपीआई महँगाई 5.6% रहेगी। कोर महँगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते, 2026-27 के लिए 4.4% अनुमानित है। अगस्त 2026 की विज्ञप्ति में पूरे वर्ष के लिए वृद्धि का अनुमान 6.7% और सीपीआई महँगाई का अनुमान 5.0% था।

गवर्नर के वक्तव्य में कहा गया कि महँगाई और उसका परिदृश्य उतना सौम्य नहीं है जितना पिछले वर्ष था, और अगली तीन तिमाहियों में हेडलाइन सीपीआई महँगाई का औसत लगभग 5.8% रहने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

एमपीसी की अगली बैठक 2-4 दिसंबर 2026 को निर्धारित है, और इस बैठक का कार्यवृत्त 21 अक्टूबर 2026 को जारी होना है।

इन आँकड़ों का आधार

दरें, वोट, रुख़, अनुमान और तारीख़ें वैसी ही हैं जैसी आरबीआई की 7 अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति वक्तव्य की प्रेस विज्ञप्ति और गवर्नर के वक्तव्य में बताई गई हैं। रेपो दर को 5.5% करने और उस पर सर्वसम्मत वोट की ख़बर उसी दिन बिज़नेस टुडे ने भी दी। पिछली दरों और अनुमानों के स्तर अगस्त 2026 की विज्ञप्ति से हैं। यह लेख यह नहीं बताता कि कोई भी बैंक अपनी ऋण या जमा दरों के साथ क्या करेगा।